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न्यू टैक्स रिजीम: ₹20 लाख पर टैक्स बचाएं

नए टैक्स रिजीम में टैक्स बचाने की रणनीति

आयकर के नए नियमों के तहत, कई लोगों को लगता है कि टैक्स बचाने के विकल्प बहुत सीमित हो गए हैं। खासकर ₹20 लाख कमाने वाले वेतनभोगी व्यक्ति के लिए, जहाँ अधिकांश छूटें और कटौतियाँ समाप्त हो गई हैं, टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, थोड़ी सी समझदारी और सही प्लानिंग से, इस नए ढांचे में भी टैक्स देनदारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है, यहाँ तक कि शून्य तक भी लाया जा सकता है।

कैसे करें टैक्स-कुशल कंपोनेंट्स का उपयोग

नए टैक्स रिजीम में, टैक्स प्लानिंग का तरीका बदल गया है। अब यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कंपनी आपके कुल सीटीसी (Cost to Company) को कैसे संरचित करती है, न कि आप बाद में कितना निवेश करते हैं। ₹20 लाख के सीटीसी को आधार मानते हुए, जिसमें बेसिक सैलरी 50% यानी ₹10 लाख हो, तो कुछ टैक्स-एफिशिएंट कंपोनेंट्स का लाभ उठाया जा सकता है:

  • मील वाउचर: यदि आपको प्रतिदिन ₹200 के दो मील वाउचर मिलते हैं और आप महीने में 22 दिन काम करते हैं, तो साल भर में लगभग ₹1.05 लाख टैक्स-फ्री हो जाते हैं।
  • EPF में एम्प्लॉयर का योगदान: आपकी बेसिक सैलरी का 12% तक का एम्प्लॉयर का योगदान, जो लगभग ₹1.2 लाख तक हो सकता है, टैक्स-फ्री होता है।
  • NPS में एम्प्लॉयर का योगदान (सेक्शन 80CCD(2)): बेसिक सैलरी का 14% तक का एम्प्लॉयर का योगदान, जो लगभग ₹1.4 लाख तक की अतिरिक्त छूट प्रदान करता है।

ये सभी लाभ मिलकर एक महत्वपूर्ण टैक्स-फ्री आधार तैयार करते हैं।

कार लीज: सबसे बड़ा टैक्स बचाने वाला विकल्प

टैक्स बचाने में सबसे बड़ा योगदान कार लीज का हो सकता है। यदि कोई कर्मचारी ₹8 लाख की कार को दो साल के लिए लीज पर लेता है, तो इसकी वार्षिक लागत (ब्याज सहित) लगभग ₹4.23 लाख आती है। जब इस खर्च को सैलरी स्ट्रक्चर के माध्यम से कवर किया जाता है, तो इसे एक टैक्स-एफिशिएंट पर्क्विजिट माना जाता है। इस एक कदम से कुल डिडक्शन में भारी वृद्धि होती है।

कार लीज को शामिल करने पर, कुल डिडक्शन लगभग ₹7.88 लाख तक पहुँच सकते हैं, जबकि इसके बिना यह आंकड़ा केवल ₹3.65 लाख रहता है। यदि आपके पास अपनी कार है, तो आप फ्यूल और ड्राइवर के खर्चों का भी दावा कर सकते हैं, बशर्ते आप लॉगबुक बनाए रखें।

₹20 लाख की आय पर टैक्स की गणना

ClearTax के अनुसार, उपरोक्त सभी डिडक्शन को शामिल करने के बाद, आपकी नेट सैलरी घटकर लगभग ₹12.11 लाख रह जाती है। इसके बाद ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन लागू होने पर, टैक्सेबल इनकम लगभग ₹11.36 लाख हो जाती है। नए टैक्स रिजीम में मिलने वाली छूट (rebate) के कारण, इस स्तर पर आपकी टैक्स देनदारी लगभग शून्य हो जाती है।

इसके विपरीत, यदि कार लीज का विकल्प नहीं चुना जाता है, तो टैक्सेबल इनकम लगभग ₹15.59 लाख रहती है, जिस पर लगभग ₹1.18 लाख का टैक्स बनता है।

वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए मुख्य सीख

नए टैक्स रिजीम में पारंपरिक निवेश-आधारित छूटें कम हो गई हैं, लेकिन एम्प्लॉयर द्वारा प्रदान किए जाने वाले कंपोनेंट्स के माध्यम से अभी भी टैक्स बचाया जा सकता है। अब टैक्स प्लानिंग का मतलब केवल साल के अंत में निवेश करना नहीं है, बल्कि अपने सीटीसी को समझदारी से संरचित करना है। बेसिक सैलरी से जुड़े योगदान और कार लीज जैसे विकल्प इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ₹20 लाख की आय का मतलब यह नहीं है कि आपको अधिक टैक्स देना ही पड़ेगा, लेकिन सही प्लानिंग के अभाव में ऐसा हो सकता है।

ClearTax के संस्थापक और सीईओ अर्चित गुप्ता के अनुसार, “₹20 लाख कमाने वाले लोग कार लीज विकल्प का उपयोग करके अपनी टैक्सेबल इनकम को शून्य तक ला सकते हैं। इससे कुल सीटीसी का लगभग 6% टैक्स बचता है और इन-हैंड सैलरी बढ़ती है, वह भी कंपनी पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना।”

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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