बैंकों को फिलहाल कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की इजाजत को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।
अपडेट को आसान भाषा में समझें
पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
ध्यान देने वाली बातें
- सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा कि आईआरडीएआई बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की इजाजत देने के पक्ष में नहीं हैं।
- आरबीआई और आईआरडीएआई बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की इजाजत देने के पक्ष में नहीं हैं।
- सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने 4 मई को यह जानकारी दी।
- इससे कमोडिटी एक्सचेंज का शेयर एक समय 3.5 फीसदी तक गिर गया।
LAMORC DIGITAL का संदर्भ
नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।
आरबीआई और आईआरडीएआई बैंकों और इंश्योरेंस कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की इजाजत देने के पक्ष में नहीं हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने 4 मई को यह जानकारी दी। इससे कमोडिटी एक्सचेंज का शेयर एक समय 3.5 फीसदी तक गिर गया। हालांकि, बाद में शेयर कुछ हद तक संभलने में कामयाब रहा।
पेंशन फंड ने भी इस मसले पर किया है विचार
SEBI ने सितंबर में कहा था कि वह कमोडिटी मार्केट्स को मजबूत बनाना चाहता है। इसके लिए वह बैंकों और पेंशन फंडों को कमोडिटीज में ट्रेडिंग की इजाजत देने के बारे में सरकार से बातचीत करेगा। 4 मई को सेबी चेयरमैन ने कहा कि पेंशन फंड रेगुलेटर ने भी पेंशन फंडों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की इजाजत देने के बारे में विचार किया है। लेकिन, उसने यह नहीं बताया है कि इस बारे में उसने क्या फैसला लिया है।
इंश्योरेंस कंपनियां लंबी अवधि के लिए करती हैं निवेश
इस मामले में बड़ी चिंता कुछ खास फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के लिए सूटेबल इंस्ट्रूमेंट्स की उपलब्धता को लेकर है। पांडेय ने कहा कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स इंश्योरेंस कंपनियों की मुख्य निवेश रणनीति से बाहर हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इंश्योरेंस कंपनियां आम तौर पर लंबी अवधि के लिए निवेश करती हैं।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर फैसले की उम्मीद नहीं
फिलहाल सेबी के इस प्रस्ताव पर आगे बढ़ने की संभावना कम लगती है। पांडेय ने कहा, “उनके अपने तर्क हैं…हम इस मामले को यहां छोड़ते हैं। ” इसका मतलब है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स में पार्टिसिपेशन का दायरा बढ़ाने के लिए अभी इंतजार करना होगा। इसके लिए तब तक इंतजार करना पड़ सकता है, जब तक रेगुलेटर्स के बीच इस मामले में व्यापक सहमति नहीं बन जाती।
सेबी एआई टूल्स पर एडवाजरी इश्यू करेगा
पांडेय ने अलग से यह बताया कि एंथ्रोपिक के मायथोस और दूसरे एआई टूल्स से जुड़े खतरों को देखते हुए सेबी जल्द मार्केट इंटरमीडियरीज को एक एडवायजरी इश्यू करेगा। उन्होंने कहा कि सेबी का मानना है कि इंटरमीडियरीज इससे जुड़े खतरों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेबी एआई से जुड़े खतरों के बारे में संबंधित पक्षों के संपर्क में है। 4 मई को एमसीएक्स का शेयर 1.5 फीसदी गिरकर 2,926.10 रुपये पर बंद हुआ।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।