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बाजार में 'डर के आगे जीत है' जैसा माहौल, 2032

बाजार में 'डर के आगे जीत है' जैसा माहौल, 2032 को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।

अपडेट को आसान भाषा में समझें

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

ध्यान देने वाली बातें

  • रामदेव अग्रवाल ने कहा कि होर्मुज ब्लॉकेड पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है।
  • भारत से ज्यादा कई अन्य देशों की स्थिति बिगड़ी है।
  • अमेरिका में भी वेस्ट एशिया जंग का असर पड़ा है।
  • वेस्ट एशिया तनाव का भारत की इकोनॉमी पर ज्यादा असर दिखेगा।

LAMORC DIGITAL का संदर्भ

नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।

वेस्ट एशिया तनाव का भारत की इकोनॉमी पर ज्यादा असर दिखेगा। ये कहना है मोतीलाल ओसवाल के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल का। सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल से खास बातचीत में उन्होंने कहा की ब्रेंट के $120-130 रहने पर सिर्फ Q1 ही नहीं पूरे साल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ब्रेंट $120/bbl के पार जाना चिंताजनक है। होर्मुज ब्लॉकेड बातचीत के जरिए खुल सकता है। होर्मुज ब्लॉकेड पूरी दुनिया के लिए चिंताजनक है। भारत से ज्यादा कई अन्य देशों की स्थिति बिगड़ी है। अमेरिका में भी वेस्ट एशिया जंग का असर पड़ा है। युद्ध से वेस्ट एशिया में कच्चा तेल उत्पादन काफी घटा है। वेस्ट एशिया जंग का असर पूरे साल तक दिख सकता है। Q1 और FY27 में काफी चुनौतियां आने का अनुमान है।

मार्केट को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का अनुमान

उन्होंने आगे कहा कि US जैसे देश को जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। US जैसे शक्तिशाली देश पर विश्व की जिम्मेदारी है। अमेरिका और चीन के कदम का बड़ा असर होता है। $120-130 पर ब्रेंट रहने से दिक्कतें ज्यादा बढ़ेंगी। कंजम्पशन से जुड़े सेक्टर्स पर सीधा असर होगा। कंपनियों को ग्राहकों पर बोझ डालना ही होगा। बेहतर वॉल्यूम के बावजूद ऑटो पर दबाव दिख रहा है। मार्केट को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का अनुमान। महंगे कच्चे तेल से इकोनॉमी की ग्रोथ पर असर होगा।

वॉल्यूम के बावजूद FMCG पर दबाव जारी

एफएमसीजी सेक्टर पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि वॉल्यूम के बावजूद FMCG पर दबाव जारी है। FMCG कंपनियों को लागत बढ़ने की चिंता है। FMCG कंपनियों में वॉल्यूम रिकवरी शुरू हुई है। महंगाई बढ़ने पर फिर दिक्कतें बढ़ सकती है। Q1 में नतीजे काफी कमजोर रहने की आशंका है। होर्मुज ब्लॉकेड से कच्चे तेल में भारी उछाल आया है। वेस्ट एशिया में हालात सुधरे तो क्रूड में गिरावट आएगी। बाजार को भरोसा है कि अनिश्चितता जल्द खत्म होगी। ईरान युद्ध संकट के अलावा बाजार का रुख मजबूत है।

पश्चिम बंगाल में BJP के जीतने से रिफॉर्म बढ़ेगा

पॉलिटिकल डेवलपमेंट से भी बाजार को सहारा संभव है। इससे इकोनॉमिक एक्टिविटी में जोरदार तेजी आएगी। बीजेपी की जीत से पूर्वी भारत में भी जोरदार रिफॉर्म देखने को मिलेंगे। पश्चिम बंगाल में BJP जीतने से रिफॉर्म बढ़ेगा। मोदी सरकार कई बड़ी घोषणाएं कर सकती है।

बाजार में गिरावट पर खरीदारी का बड़ा मौका

उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम एशिया तनाव से बाजार में गिरावट है। बाजार में गिरावट पर खरीदारी का बड़ा मौका है है। बाजार में ‘डर के आगे जीत है’ जैसा माहौल है। भारतीय बाजारों में निवेश का माहौल बेहतर हुआ। फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट शेयरों में निवेश के अच्छे मौके हैं। अच्छी ग्रोथ और सस्ते वैल्युएशन वाली कंपनियों में निवेश करें। कई क्वालिटी शेयर अब सस्ते वैल्युएशन पर हैं। IPO मार्केट में अभी पैसा नहीं बन रहा है। IT में नौकरिया बढ़ाकर ग्रोथ हासिल करना अब संभव नहीं है। IT सेक्टर अब बदलाव की तरफ बढ़ रहा है। IT सेक्टर का बिजनेस मॉडल शिफ्ट हुआ है।

भारत की इकोनॉमी अभी 4 लाख करोड़ डॉलर की है। अगले 10 साल में 10 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी होगी। GDP साइज देखते हुए प्लेटफॉर्म इंडस्ट्री में अच्छी ग्रोथ संभव है।

रेगुलेटरी मंजूरी मिलने से भारत का विदेश में निवेश बढ़ेगा

इमर्जिंग मार्केट में FIIs निवेश नहीं आ रहा है। विकसित बाजारों पर FIIs का ज्यादा फोकस है। चीन और कोरिया जैसे देशों की AI ग्रोथ मजबूत रहेगी। AI सेगमेंट में भारत अभी भी काफी पीछे है। कोरिया और चीन के मार्केट अब भी सस्ते हैं। भारत के मार्केट में घरेलू फ्लो लगातार बढ़ रहा है। MFs को दुनियाभर के ETFs में निवेश की मंजूरी मिलना चाहिए। घरेलू MFs को विदेश में निवेश की रेगुलेटरी मंजूरी मिलनी चाहिए। रेगुलेटरी मंजूरी मिलने से भारत का विदेश में निवेश बढ़ेगा। भारत के निवेशक विदेशी मार्केट में पैसा लगाएंगे। गिरावट वाले बाजार में निवेश की शुरुआत का बेहतर मौका है। लंबी अवधि के नजरिए से जबरदस्त ग्रोथ का अनुमान है। 2032 में निफ्टी 50,000 तक जा सकता है। सभी दिक्कतें लंबी अवधि में खत्म हो जाएंगी।

MOFSL नतीजों पर रामदेव अग्रवाल

ऑपरेटिंग प्रॉफिट पर कंट्रोल संभव है। मार्केट पर नहीं। FY26, Q4 में ऑपरेटिंग प्रॉफिट में अच्छी ग्रोथ रही। ऑपरेटिंग ग्रोथ से कैपिटल मार्केट में ग्रोथ का भरोसा बढ़ा है। मोतीलाल ओसवाल का कई सेगमेंट में कारोबार है। हर साल 6 में से 3 सेगमेंट में शानदार ग्रोथ रहती है। FY26 में रेगुलेटरी दिक्कतों से रिटेल बुकिंग पर असर पड़ा। हाउसिंग, वेल्थ और AMC कारोबार में मजबूत ग्रोथ देखने को मिली है। कंपनी ने काफी फंड जुटाए है। ग्रोथ पर फोकस बना हुआ है। कैपिटल मार्केट से जुड़े इंडस्ट्री में अच्छी ग्रोथ देखने को मिल रही है।

अनिश्चितता में भी हर साल ग्रोथ बढ़ाने पर फोकस है। बंगलुरु और अहमदाबाद में निवेश बढ़ाने पर फोकस है। 10 बड़े शहरों में निवेश बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। अगले 10 साल में कैपिटल मार्केट में ग्रोथ शानदार रहेगी। 22.5 करोड़ डीमैट अकाउंट के साथ भारत सबसे बड़ा बाजार है। अगले 7-8 साल में डीमैट अकाउंट 50 करोड़ तक होंगे।

कंपनी पिछले 40 साल से काम कर रही है। आगे ग्रोथ के कई बड़े ट्रिगर होंगे। FY26 में कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 2500 करोड़ रुपए रहा। पिछले 10 साल में आय ग्रोथ 27 फीसदी और मुनाफा ग्रोथ 33 फीसदी रहा। अगले 10 साल में कंपनी की ग्रोथ और मजबूत होगी। कंपनी का बेस काफी ज्यादा बढ़ेगा। कंपनी ने टैलेंट मैनेजमेंट पर बड़ा फोकस किया है। इस ब्रांड को अलग स्तरों पर ले जाने की तैयारी है। FY27 में मजबूत रिटेल ब्रोकिंग वॉल्यूम संभव है। FY26 में रिटेल ब्रोकिंग को लेकर चुनौतियां रहीं। रिटेल ब्रोकिंग के लिए रेगुलेटरी चुनौतियां थीं। FY26 में कंपनी का शानदार ऑपरेटिंग प्रदर्शन किया है। ट्रेजरी सेगमेंट कंपनी के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

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यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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