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सैलरी से हर महीने कटता है PF, लेकिन रिटायरमेंट में कितना पर

सैलरी से हर महीने कटता है PF, लेकिन रिटायरमेंट में कितना पर को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।

अपडेट को आसान भाषा में समझें

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

ध्यान देने वाली बातें

  • हर महीने सैलरी आते ही एक रकम चुपचाप कट जाती है और ज्यादातर लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि यह PF है।
  • लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इस कटौती का एक हिस्सा भविष्य के बड़े फंड के…
  • लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इस कटौती का एक हिस्सा भविष्य के बड़े फंड के लिए जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन के लिए।
  • यही वजह है कि नौकरी करने वाले लाखों लोग सालों तक पैसा कटने के बावजूद यह नहीं समझ पाते कि आखिर रिटायरमेंट पर उन्हें करोड़ों रुपये मिलेंगे या सिर्फ कुछ हजार रुपये की पेंशन।

LAMORC DIGITAL का संदर्भ

नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।

हर महीने सैलरी आते ही एक रकम चुपचाप कट जाती है और ज्यादातर लोग सिर्फ इतना जानते हैं कि यह PF है। लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि इस कटौती का एक हिस्सा भविष्य के बड़े फंड के लिए जाता है, जबकि दूसरा हिस्सा रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन के लिए। यही वजह है कि नौकरी करने वाले लाखों लोग सालों तक पैसा कटने के बावजूद यह नहीं समझ पाते कि आखिर रिटायरमेंट पर उन्हें करोड़ों रुपये मिलेंगे या सिर्फ कुछ हजार रुपये की पेंशन। दरअसल, सैलरी से कटने वाला पैसा दो हिस्सों में जाता है ईम्पलॉयी प्रॉविडेंट फंड (EPF) और ईम्पलॉयीज पेंशन स्कीम (EPS)। दोनों का मकसद अलग है और रिटायरमेंट पर मिलने वाला फायदा भी पूरी तरह अलग होता है।

EPF और EPS में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

EPF एक तरह का सेविंग्स फंड है, जहां आपका और कंपनी का पैसा जमा होता रहता है और उस पर हर साल ब्याज मिलता है। फिलहाल EPF पर 8.25% ब्याज दिया जा रहा है। लंबे समय तक पैसा जमा रहने और कंपाउंडिंग की वजह से यह बड़ा रिटायरमेंट फंड बना सकता है।

वहीं EPS कोई सेविंग्स स्कीम नहीं है। इसमें आपके नाम से कोई बड़ा फंड जमा नहीं होता और इस पर ब्याज भी नहीं मिलता। इसका मकसद सिर्फ रिटायरमेंट के बाद हर महीने तय पेंशन देना है। यानी EPF आपको बड़ा फंड देता है। और EPS आपको हर महीने पेंशन देता है।

सैलरी से कटने वाला पैसा कहां जाता है?

हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12% PF में जाता है और उतना ही हिस्सा कंपनी भी देती है। लेकिन कंपनी का पूरा पैसा EPF में नहीं जाता। कर्मचारी का पूरा 12% EPF में जाता है। कंपनी के 12% में से 8.33% EPS में जाता है। बाकी 3.67% EPF में जमा होता है। हालांकि EPS में जाने वाली रकम की लिमिट तय है। अधिकतम 1,250 रुपये महीने तक ही EPS में जाते हैं।

EPF कैसे बना सकता है करोड़ों का फंड?

EPF की असली ताकत कंपाउंडिंग है। अगर कोई व्यक्ति नौकरी की शुरुआत से लगातार 30-35 साल तक PF जमा करता रहे और बीच में पैसा न निकाले, तो रिटायरमेंट तक 2 करोड़ से 3.5 करोड़ रुपये तक का फंड बन सकता है। लेकिन कई लोग नौकरी बदलते समय PF निकाल लेते हैं, जिससे लंबे पीरियड की कंपाउंडिंग टूट जाती है और बड़ा नुकसान होता है।

EPS में कितनी मिलती है पेंशन?

यहां पेंशन लायक सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये मानी जाती है। इसी वजह से लंबे समय तक नौकरी करने के बाद भी सामान्य EPS नियमों में पेंशन करीब 8,571 रुपये महीने तक ही पहुंच पाती है। फिलहाल न्यूनतम EPS पेंशन 1,000 रुपये है, लेकिन खबरों के मुताबिक सरकार इसे बढ़ाकर 3,000 रुपये करने पर विचार कर रही है।

EPS पेंशन पाने के लिए क्या शर्त है?

EPS का फायदा पाने के लिए कम से कम 10 साल नौकरी करना जरूरी है। इसके बाद 58 साल की उम्र पर पूरी पेंशन मिलती है। 50 साल की उम्र से कम पेंशन के साथ शुरुआत हो सकती है। अगर 10 साल पूरे होने से पहले नौकरी छोड़ दी जाए, तो पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसे में सीमित पैसा या स्कीम सर्टिफिकेट मिलता है।

सिर्फ EPS पर निर्भर रहना क्यों खतरनाक हो सकता है?

EPS की सबसे बड़ी खामी यह है कि इसकी पेंशन महंगाई के हिसाब से नहीं बढ़ती। आज जो 8,000 रुपये ठीक लगते हैं, वही 15-20 साल बाद बहुत कम पड़ सकते हैं। इसी वजह से एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि रिटायरमेंट के लिए सिर्फ EPS पर भरोसा न करें। इसके साथ अन्य ऑप्शन में भी निवेश करें।

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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