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Jewellery Insurance: पूरी बात आसान भाषा में

Jewellery Insurance: पूरी बात आसान भाषा में को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।

अपडेट को आसान भाषा में समझें

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

ध्यान देने वाली बातें

  • Jewellery Insurance: सोने की बढ़ती कीमतों के साथ ज्वेलरी से जुड़ा जोखिम भी बढ़ गया है, लेकिन इंश्योरेंस कवर अभी भी कम है।
  • जानिए ज्वेलरी इंश्योरेंस में क्या-क्या कवर होता है और…
  • Jewellery Insurance: सोने की कीमत करीब ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है।
  • इससे घरों और कारोबार दोनों में सोने की कुल वैल्यू काफी बढ़ गई है।

LAMORC DIGITAL का संदर्भ

नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।

Jewellery Insurance: सोने की कीमत करीब ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। इससे घरों और कारोबार दोनों में सोने की कुल वैल्यू काफी बढ़ गई है। इसके साथ ही ज्वेलरी के साथ जुड़ा जोखिम भी बढ़ रहा है।

भारत में लोग सोना तो लगातार खरीद रहे हैं, लेकिन उसके हिसाब से इंश्योरेंस नहीं ले रहे। इससे ग्राहक और ज्वेलर्स दोनों चोरी-नुकसान जैसे जोखिम के प्रति ज्यादा असुरक्षित हो गए हैं।

महंगा सोना, ज्यादा जोखिम

घर में रखी ज्वेलरी की वैल्यू बढ़ने से चोरी, सेंधमारी या गलती से नुकसान का खतरा ज्यादा हो जाता है। वहीं ज्वेलर्स के लिए जोखिम और बड़ा है, क्योंकि उनका स्टॉक महंगा हो गया है और उसे स्टोर करने, दिखाने और ट्रांसपोर्ट करने के दौरान खतरा बढ़ गया है।

छोटे ज्वेलर्स सबसे ज्यादा कमजोर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों के कई छोटे और मध्यम ज्वेलर्स के पास पर्याप्त इंश्योरेंस नहीं है या वे बिल्कुल कवर नहीं हैं। यही हाल कारीगरों, ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर्स का भी है।, जो रोजाना महंगी ज्वेलरी के साथ काम करते हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त सुरक्षा नहीं होती।

बड़ा कारोबार, छोटा इंश्योरेंस

भारत में ज्वेलरी इंश्योरेंस मार्केट का आकार सिर्फ ₹250-500 करोड़ है। वहीं, जिस इंडस्ट्री को यह कवर करता है, उसकी वैल्यू करीब ₹4.7 लाख करोड़ है।

इससे साफ है कि इस सेक्टर में इंश्योरेंस बहुत कम है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इसकी वजह सिर्फ जागरूकता की कमी नहीं, बल्कि यह भी है कि लोग इसे जरूरी सुरक्षा के बजाय अतिरिक्त खर्च समझते हैं।

ज्वेलर्स को क्या मिलता है कवर

ज्वेलर्स के लिए ‘ज्वेलर्स ब्लॉक इंश्योरेंस’ एक अहम पॉलिसी मानी जाती है। यह खास तौर पर ज्वेलरी कारोबार से जुड़े जोखिमों को कवर करने के लिए बनाई गई है।

इसमें चोरी, सेंधमारी और लूट जैसे सामान्य जोखिम शामिल होते हैं। साथ ही आग या प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को भी कवर किया जाता है।

इसके अलावा कर्मचारियों की धोखाधड़ी से होने वाले नुकसान को भी इसमें शामिल किया जाता है, जो अक्सर नजरअंदाज किया जाता है लेकिन कई मामलों में सामने आता है।

ट्रांजिट के दौरान होने वाले जोखिम भी इसमें कवर होते हैं। जैसे ज्वेलरी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना या ग्राहकों तक पहुंचाना।

ग्राहकों के लिए क्या मायने

आम लोगों के लिए ज्वेलरी इंश्योरेंस एक तरह का सुरक्षा कवच है, क्योंकि ज्वेलरी की कीमत सिर्फ पैसे में नहीं, भावनाओं में भी होती है। इन पॉलिसियों में चोरी, गलती से नुकसान और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कवर किया जाता है।

जब सोने की कीमतें इतनी ऊंचाई पर हैं, तब खोई या चोरी हुई ज्वेलरी को दोबारा खरीदना बहुत महंगा हो सकता है। ऐसे में इंश्योरेंस यह सुनिश्चित करता है कि पूरा आर्थिक बोझ ग्राहक पर न आए।

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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