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सोने-चांदी में गिरावट, मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों के

कीमतों में गिरावट: डॉलर की मजबूती और तेल की कीमतों का असर

इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखी जा रही है। मजबूत अमेरिकी डॉलर और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के दबाव के चलते बुलियन (सोना-चांदी) की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच महंगाई और ब्याज दरों को लेकर अपनी उम्मीदों पर फिर से विचार कर रहे हैं।

स्पॉट गोल्ड की कीमतें लगभग 0.3% गिरकर $4,694 प्रति औंस के करीब आ गई हैं। वहीं, COMEX गोल्ड फ्यूचर्स शुरुआती कारोबार में 0.58% की गिरावट के साथ $4,713 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की गिरावट देखी गई है। स्पॉट चांदी की कीमतें लगभग $75 प्रति औंस और COMEX चांदी 1.23% गिरकर $75.47 प्रति औंस पर आ गई है।

गिरावट के पीछे के कारण

सोने-चांदी में आई यह कमजोरी कई मैक्रोइकॉनॉमिक और भू-राजनीतिक कारकों का मिलाजुला असर है:

  • मजबूत डॉलर: अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्राओं वाले निवेशकों के लिए सोना और चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इनकी मांग पर असर पड़ता है।
  • कच्चे तेल में उछाल: कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे यह उम्मीद बढ़ गई है कि केंद्रीय बैंक, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व, ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
  • भू-राजनीतिक अनिश्चितता: मध्य पूर्व में ऊर्जा प्रवाह में लगातार बाधाएं और भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव सोने जैसी सुरक्षित निवेश संपत्तियों पर पड़ रहा है।

उच्च ब्याज दरें सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव डालती हैं, क्योंकि ब्याज देने वाली संपत्तियां उनके मुकाबले अधिक आकर्षक हो जाती हैं।

एक मजबूत रैली के बाद ठहराव और मांग के संकेत

यह गिरावट पिछले हफ्ते की मजबूत बढ़त के बाद आई है। पिछले सप्ताह सोने में 2.5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि इससे पहले लगातार चार हफ्तों तक सोने की कीमतों में तेजी देखी गई थी। यह दर्शाता है कि मौजूदा चाल शायद किसी बड़े संरचनात्मक बदलाव के बजाय कुछ हद तक मुनाफावसूली और बाजार के समेकन का परिणाम हो सकती है।

हालांकि, भौतिक बाजार से मिले-जुले संकेत मिल रहे हैं। भारत में, कम आपूर्ति के कारण सोने के प्रीमियम दो महीने से अधिक समय में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं। वहीं, चीन में भी खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ी है। यह दर्शाता है कि घरेलू मांग में कोई खास कमी नहीं आई है।

दूसरी ओर, दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड-ईटीएफ, SPDR गोल्ड ट्रस्ट की होल्डिंग्स में 0.2% की कमी आई है, जो संस्थागत निवेश प्रवाह में कुछ नरमी का संकेत देती है।

आगे क्या उम्मीद करें?

बाजार की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले नीतिगत फैसले पर टिकी हैं। ब्याज दरों के भविष्य के मार्ग के बारे में कोई भी संकेत अल्पावधि में बुलियन की कीमतों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन सोने के लिए समग्र दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक, कॉलिन शाह के अनुसार, हालिया गिरावट एक मजबूत रैली के बाद आई है और यह भू-राजनीतिक तनाव, उच्च तेल कीमतों और मजबूत डॉलर जैसे कारकों के कारण हुई है।

शाह ने कहा, “युद्धविराम की उभरती संभावनाओं के साथ, यह उम्मीद जगी है कि मांग फिर से शुरू होने पर सोने की कीमतें फिर से बढ़ना शुरू हो जाएंगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि उपभोक्ता व्यवहार बदल रहा है, जहां खरीदार मात्रा के बजाय गुणवत्ता और डिजाइन को प्राथमिकता दे रहे हैं। यह एक ऐसा चलन है जो एक संपत्ति के रूप में सोने में निरंतर विश्वास को दर्शाता है।

शाह को उम्मीद है कि भू-राजनीतिक जोखिम कम होने पर भी मांग मजबूत बनी रहेगी, जो सोने की एक विश्वसनीय सुरक्षित निवेश संपत्ति के रूप में भूमिका को उजागर करता है। हालांकि यह वृद्धि धीमी हो सकती है, लेकिन वित्तीय वर्ष के दौरान कीमतें $5,000 प्रति औंस के स्तर तक जा सकती हैं।

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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