Gold ETF: पूरी बात आसान भाषा में को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।
अपडेट को आसान भाषा में समझें
पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
ध्यान देने वाली बातें
- Gold ETF में गिरावट से निवेशक चिंतित हैं।
- क्या यह सिर्फ अस्थायी दबाव है या बड़ा संकेत?
- डॉलर, क्रूड और ग्लोबल हालात के बीच अब निवेशकों को क्या करना चाहिए, एक्सपर्ट की राय समझिए।
- Gold ETF: पिछले कुछ समय से Gold ETF में काफी उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
LAMORC DIGITAL का संदर्भ
नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।
Gold ETF: पिछले कुछ समय से Gold ETF में काफी उतार-चढ़ाव दिख रहा है। 4 मई को भी गोल्ड ETF में गिरावट देखने को मिली, जो पूरे सेगमेंट में कमजोरी का संकेत देती है। गोल्ड ETF की कमजोरी MCX पर भी दिखी। सोना MCX पर करीब 1.32% यानी ₹2000 गिरकर लगभग ₹1.50 प्रति 10 ग्राम के नीचे आ गया।
HSBC Gold ETF, Invesco India Gold ETF, Axis Gold ETF, Nippon India ETF Gold BeES से लेकर ICICI Prudential Gold ETF में 1 से 2% के बीच गिरावट आई। हालांकि इन सभी फंड्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम मजबूत बना रहा।
गिरावट की बड़ी वजह क्या है
AMFI-रजिस्टर्ड MFD अभिषेक भिलवारिया के मुताबिक, गोल्ड ETF में गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में कमी है। यह गिरावट अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने से आई है, जिससे सोने जैसे सेफ हेवन एसेट की मांग कम हुई है।
WealthMills Securities के रिसर्च डायरेक्टर क्रांति बाथिनी के अनुसार, डॉलर मजबूत रहने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची रहने से सोने पर दबाव बना हुआ है। जब क्रूड महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है, जिससे सोने की कीमतों पर असर पड़ता है। साथ ही, अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने से भी सोने पर दबाव है।
डर और उम्मीद के बीच बाजार
कच्चे तेल की कीमतें करीब $114 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। ईरान से जुड़े तनाव ने बाजार को असमंजस में डाल रखा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान का शांति प्रस्ताव पर्याप्त नहीं हो सकता, जिससे अनिश्चितता बनी हुई है।
हालांकि, कुछ राहत के संकेत भी हैं। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में न्यूट्रल जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने की बात कही है, जिससे सप्लाई को लेकर चिंता थोड़ी कम हो सकती है। CRForex Advisors के CEO अमित पाबरी के मुताबिक, बाजार फिलहाल डर और उम्मीद के बीच फंसा हुआ है और इसका असर करेंसी पर भी दिख रहा है।
सोना अभी कंसोलिडेशन में
क्रांति बाथिनी का कहना है कि पिछले कुछ सालों की तेजी के बाद सोना अभी कंसोलिडेशन फेज में है। उन्होंने यह भी कहा कि इक्विटी मार्केट की चाल को सोने से सीधे जोड़ना सही नहीं है, क्योंकि दोनों अलग तरह से काम करते हैं।
शेयर बाजार में मजबूती
इस बीच शेयर बाजार में हल्की तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी करीब 0.5% बढ़त के साथ क्रमशः 77,269 और 24,119 पर बंद हुए।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निवेशक छोटे समय के उतार-चढ़ाव के पीछे न भागें। गिरावट के दौरान धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है। 2-3 साल के नजरिए से गोल्ड में निवेश फायदेमंद हो सकता है।
अमित पाबरी के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स (DXY) एक अहम स्तर पर है। अगर इसमें कमजोरी आती है, तो कमोडिटी की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
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यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।