LAMORC DIGITAL

रोनाल्ड रीड बनाम वॉरेन बफे: कौन सी निवेश रणनीति सफल रही?

रोनाल्ड रीड और वॉरेन बफे: दो अलग-अलग निवेश रणनीतियां

शेयर बाजार में सफल निवेश करने के लिए, आपको किसके रास्ते पर अमल करना चाहिए? रोनाल्ड रीड या वॉरेन बफे? दोनों निवेशकों ने अपने तरीके से सफलता हासिल की है, लेकिन उनकी रणनीतियां अलग-अलग हैं।

  • रोनाल्ड रीड ने एक सरल और अनुशासित निवेश रणनीति अपनाई, जिसमें उन्होंने मजबूत कंपनियों में निवेश किया और डिविडेंड को दोबारा निवेश किया।
  • वॉरेन बफे की रणनीति गहरी शोध और बिजनेस क्वालिटी पर केंद्रित है, जिसमें उन्होंने मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त वाली कंपनियों में निवेश किया।
  • दोनों निवेशकों की कहानी एक ही बात साबित करती है कि शेयर बाजार में असली ताकत ‘कंपाउंडिंग’ और ‘समय’ की होती है।

आम निवेशकों के लिए, रोनाल्ड रीड की रणनीति ज्यादा व्यावहारिक मानी जा सकती है, जबकि वॉरेन बफे की शैली ज्यादा बेहतर रिटर्न दे सकती है, लेकिन इसमें गलत फैसले का जोखिम भी ज्यादा रहता है।

अगर आप शेयर मार्केट से अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं, तो आपको किसके रास्ते पर अमल करना चाहिए… वॉरेन बफे या फिर रोनाल्ड रीड। बफे के नाम से तो हर कोई वाकिफ है। उन्होंने निवेश करके करीब 150 अरब डॉलर की संपत्ति बनाई। दुनियाभर के निवेश उनके नक्शेकदम पर चलते हैं।

लेकिन रोनाल्ड रीड… वो कौन थे? अमेरिका के रोनाल्ड रीड सफाई कर्मी और गैस अडेंटेंड की मामूली नौकरी करते थे। लेकिन, उन्होंने धीरे-धीरे ब्लू-चिप शेयरों में निवेश करके 8 मिलियन डॉलर यानी करीब 75 करोड़ की संपत्ति बनाई।

रोनाल्ड रीड कैसे निवेश करते थे?

रोनाल्ड रीड की रणनीति बेहद सरल थी। वे ऐसी कंपनियों में निवेश करते थे, जिन्हें वे मजबूत समझते थे और जो नियमित डिविडेंड देती थीं। वे डिविडेंड को दोबारा निवेश करते थे। उनके पोर्टफोलियो में Johnson & Johnson, Procter & Gamble, JPMorgan Chase और CVS Health जैसी कंपनियां शामिल थीं। वे टेक्नोलॉजी और ट्रेंड वाले शेयरों से दूर रहते थे। उनकी मौत के समय उनके पास 95 से ज्यादा शेयर थे।

रीड की सबसे बड़ी ताकत थी धैर्य। उन्होंने 1959 में Pacific Gas & Electric के शेयर खरीदे और दशकों तक होल्ड किए। वे बाजार की गिरावट से घबराते नहीं थे। यहां तक कि Lehman Brothers जैसी कंपनी के डूबने के बाद भी उनका पोर्टफोलियो ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ, क्योंकि उन्होंने अच्छा डाइवर्सिफिकेशन रखा था।

रीड का हर निवेश सफल नहीं था

जैसे कि शेयर बाजार और कारोबार जगत की खासियत है, आपका हर निवेश सफल नहीं हो सकता। आपका कितनी भी सावधानी बरतें। कोई न कोई गलती तो हो ही जाती है। रीड के भी सभी निवेश सफल नहीं रहे। उदाहरण के लिए, उनके पोर्टफोलियो में Lehman Brothers के शेयर भी थे, जो 2008 में दिवालिया हो गई थी।

इसके बावजूद उन्होंने अपने निवेश लंबे समय तक बनाए रखे, जो उनकी रणनीति का अहम हिस्सा था। रीड के पास अपनी मौत के समय कम से कम 95 कंपनियों के शेयर थे।

वॉरेन बफे का निवेश स्टाइल कैसा है?

वॉरेन बफे की रणनीति भी लंबी अवधि की है, लेकिन उनका फोकस रोनाल्ड रीड से ज्यादा गहरी रिसर्च और बिजनेस क्वालिटी पर रहा। बफे सिर्फ सस्ते शेयर नहीं खरीदते, बल्कि ऐसी कंपनियां चुनते हैं जिनके पास मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हो। जैसे Apple Inc., Coca-Cola और American Express।

बफे का मशहूर सिद्धांत है, ‘अगर किसी स्टॉक को 10 साल रखने की तैयारी नहीं है, तो उसे 10 मिनट के लिए भी मत खरीदिए।’ वे बिजनेस की कमाई, मैनेजमेंट, ब्रांड और लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को गहराई से समझकर निवेश करते। Berkshire Hathaway ने करीब 60 साल में 20% सालाना कंपाउंड रिटर्न दिया, जो बाजार औसत से काफी ज्यादा है।

दोनों में सबसे बड़ा फर्क क्या है

सबसे बड़ा फर्क यह है कि रोनाल्ड रीड ‘सिंपल और डिसिप्लिन्ड’ निवेशक थे। वहीं, वॉरेन बफे ‘हाई-कन्विक्शन वैल्यू इन्वेस्टर’ हैं।

रीड ने ज्यादा डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाया और लगातार अच्छे डिविडेंड वाले शेयर खरीदते रहे। वहीं बफे कम लेकिन बेहद मजबूत बिजनेस में बड़ा निवेश करते हैं। रीड का फोकस था ‘धीरे-धीरे धन बनाना’। बफे का फोकस ‘बेहतरीन बिजनेस को सही कीमत पर खरीदना’ है।

आम निवेशकों के लिए किसका रास्ता बेहतर

ज्यादातर रिटेल निवेशकों के लिए रोनाल्ड रीड की रणनीति ज्यादा व्यावहारिक मानी जा सकती है। इसकी वजह यह है कि हर व्यक्ति वॉरेन बफे जैसी रिसर्च, बैलेंस शीट एनालिसिस और बिजनेस समझ विकसित नहीं कर सकता।

अच्छी कंपनियां खरीदो नियमित निवेश करो डिविडेंड दोबारा लगाओ लंबे समय तक होल्ड करो

यह रणनीति SIP और इंडेक्स निवेश करने वालों के लिए भी काफी करीब मानी जा सकती है। जिन निवेशकों को बिजनेस समझने, बैलेंस शीट पढ़ने और वैल्यूएशन का अनुभव है, उनके लिए वॉरेन बफे की शैली ज्यादा बेहतर रिटर्न दे सकती है। लेकिन इसमें गलत फैसले का जोखिम भी ज्यादा रहता है।

सबसे बड़ा सबक क्या है

दोनों निवेशकों की कहानी एक ही बात साबित करती है कि शेयर बाजार में असली ताकत ‘कंपाउंडिंग’ और ‘समय’ की होती है। रोनाल्ड रीड ने मामूली नौकरी के बावजूद करोड़ों डॉलर की संपत्ति बनाई। वॉरेन बफे की संपत्ति का बड़ा हिस्सा 60 साल की उम्र के बाद बना।

यानी निवेश में जल्दी अमीर बनने की कोशिश से ज्यादा जरूरी है लंबे समय तक टिके रहना। लेकिन, कई निवेशक जल्दबाजी में ट्रेंडिंग स्टॉक खरीदते हैं। और मार्केट क्रैश में अपना भारी नुकसान करा बैठते हैं।

CIBIL Score: सिर्फ अच्छे CIBIL स्कोर से नहीं चलेगा काम, अब लोन देने से पहले ये चीजें भी देखते हैं बैंक

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Build a better, regular income stream with LAMORC DIGITAL. Join as our partner today.

Become Our Partner Now

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top