8वें वेतन आयोग की बैठक: न्यूनतम वेतन ₹65,000 की मांग प्रमुखता से उठी
देश भर के लगभग 49 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण बैठक हाल ही में महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित की गई। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग ने 4 और 5 मई को विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ विस्तृत चर्चा की, जिसमें वेतन, पेंशन और अन्य भत्तों से संबंधित कई अहम सुझावों पर विचार-विमर्श हुआ।
वेतन संरचना में बड़े बदलावों के प्रस्ताव
महाराष्ट्र राज्य जुनी पेंशन संगठन (MSOPO) ने आयोग के समक्ष अपनी मांगों का एक विस्तृत चार्टर प्रस्तुत किया है। इस चार्टर में सबसे प्रमुख मांग न्यूनतम वेतन को वर्तमान ₹18,000 से बढ़ाकर ₹65,000 करने की है। संगठन का मानना है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह वृद्धि कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगी।
वेतन निर्धारण के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को भी बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। जहाँ 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था, वहीं MSOPO ने इसे बढ़ाकर 3.8 करने की वकालत की है।
इसके अतिरिक्त, न्यूनतम वेतन तय करने के लिए ‘फैमिली यूनिट’ की परिभाषा में भी बदलाव का प्रस्ताव है। वर्तमान में 3 सदस्यों को इकाई माना जाता है, लेकिन संगठन ने माता-पिता को शामिल कर 5 सदस्यों की इकाई के आधार पर वेतन गणना की मांग की है।
भत्तों और पेंशन सुधारों पर जोर
कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न भत्तों में वृद्धि की भी मांग की गई है। मकान किराया भत्ता (HRA) की दरों को 10%, 20%, 30% से बढ़ाकर 12%, 24% और 36% करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, HRA को महंगाई भत्ते (DA) से लिंक न करने की भी मांग की गई है, जिस पर आयोग ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। यात्रा भत्ते (TA) में 6वें वेतन आयोग की तर्ज पर 2.5 गुना वृद्धि का प्रस्ताव है, और वार्षिक वेतन वृद्धि को 3% से बढ़ाकर 5% करने की भी बात कही गई है।
पेंशन के मुद्दे पर, संगठन ने देश भर के 85 लाख NPS कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की पुरजोर मांग की है। सेवा के दौरान मृत्यु होने पर मिलने वाली फैमिली पेंशन की दर को अंत तक 50% बनाए रखने और पेंशन में 20% की अतिरिक्त वृद्धि का लाभ 80 वर्ष के बजाय 75 वर्ष की आयु से ही शुरू करने का सुझाव दिया गया है। यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) और NPS की कमियों को उजागर करते हुए, संगठन ने न्यूनतम 10% ब्याज की गारंटी की भी मांग की है।
ग्रेच्युटी और अन्य लाभों में सुधार की मांग
रिटायरमेंट के समय मिलने वाले ग्रेच्युटी लाभों में भी सुधार का प्रस्ताव है। संगठन ने ग्रेच्युटी की गणना के फॉर्मूले में बदलाव कर इसे वेतन के 1/4 के बजाय 1/3 करने और अधिकतम सीमा को बढ़ाकर ₹50 लाख करने की मांग की है। ग्रेच्युटी की गणना 33 वर्ष की कैपिंग के बजाय वास्तविक सेवा वर्षों के आधार पर करने का भी सुझाव दिया गया है।
बैठक में शिक्षकों के लिए ‘सुनिश्चित प्रगति योजना’ (10, 20, 30 फॉर्मूला) के लाभों को लागू करने और प्रमोशन के समय वेतन वृद्धि से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने पर भी चर्चा हुई। आयोग ने इन मुद्दों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
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