ITR Filing: पूरी बात आसान भाषा में को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।
अपडेट को आसान भाषा में समझें
पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
ध्यान देने वाली बातें
- Income Tax Return Filing: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैक्स असेसमेंट 2025 के नए एक्ट के बजाय पुराने 'इनकम टैक्स एक्ट 1961' के तहत ही होगा।
- ITR Forms: आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म ITR-1 से ITR-7 नोटिफाई कर दिए है।
- इसके तहत नौकरीपेशा लोग, पेंशनभोगी और कारोबारी अब अपनी सालाना कमाई का हिसाब सरकार को दे सकते हैं।
- रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 तय की गई है।
LAMORC DIGITAL का संदर्भ
नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।
ITR Forms: आयकर विभाग ने असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए नए इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म ITR-1 से ITR-7 नोटिफाई कर दिए है। इसके तहत नौकरीपेशा लोग, पेंशनभोगी और कारोबारी अब अपनी सालाना कमाई का हिसाब सरकार को दे सकते हैं। रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2026 तय की गई है।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैक्स असेसमेंट पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ के तहत ही होगा, नए 2025 एक्ट के तहत नहीं। इसलिए आपको फॉर्म में ‘Tax Year’ की जगह ‘Assessment Year’ जैसे पुराने शब्द ही देखने को मिलेंगे। जानिए आपके लिए कौन सा फॉर्म होगा बेस्ट।
ITR-1(सहज): यह फॉर्म उन रेजिडेंट भारतीयों के लिए है जिनकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है। इसके तहत सैलरी, पेंशन, एक घर और ब्याज जैसे अन्य स्रोतों से होने वाली आय शामिल होती है। साथ ही अगर आपको ₹1.25 लाख तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (112A) हुआ है, तब भी आप इसे भर सकते हैं। वहीं जिनका बिजनेस है, एक से ज्यादा घर हैं या विदेशी संपत्ति है, वे यह फॉर्म नहीं भर सकते।
निवेश और विदेशी संपत्ति वालों के लिए
ITR-2: अगर आप ITR-1 की शर्तों में फिट नहीं बैठते और आपका कोई बिजनेस नहीं है, तो यह फॉर्म आपके लिए है। इसके तहत आय के स्रोत शेयर या प्रॉपर्टी बेचकर हुआ मुनाफा, एक से ज्यादा घर से किराया, विदेशी आय या संपत्ति शामिल होते है। हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) और अनिवासी भारतीय (NRI) भी इसका उपयोग करते हैं।
ITR-3: यह उन लोगों और HUF के लिए है जो खुद का बिजनेस या प्रोफेशन चलाते हैं और जिनका टर्नओवर ₹50 लाख से ज्यादा है या जो बाकायदा बही-खाता मेंटेन करते हैं।
ITR-4 (सुगम): यह उन छोटे व्यापारियों और प्रोफेशनल्स के लिए है जिनकी आय ₹50 लाख तक है और जो प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम (धारा 44AD, 44ADA) चुनते हैं। इसमें आपको खर्चों का हिसाब देने के बजाय टर्नओवर के एक निश्चित प्रतिशत पर टैक्स देना होता है।
ITR-5: पार्टनरशिप फर्म, LLP और को-ऑपरेटिव सोसायटियों के लिए।
ITR-6: उन कंपनियों के लिए जो चैरिटी की छूट नहीं लेतीं।
ITR-7: ट्रस्ट, राजनीतिक दलों और वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थाओं के लिए।
गलती सुधारने का है मौका
ITR-U: अगर आपने पिछले रिटर्न में कोई जानकारी छोड़ दी है या गलती की है, तो आप असेसमेंट ईयर खत्म होने के 48 महीनों के भीतर उसे सुधार सकते हैं।
वेरिफिकेशन (ITR-V): रिटर्न फाइल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसे वेरिफाई करना अनिवार्य है। आप इसे आधार OTP या नेट बैंकिंग के जरिए ऑनलाइन कर सकते हैं, वरना आपका रिटर्न अमान्य माना जाएगा।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।