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1 अप्रैल से लागू होंगे नए इनकम टैक्स नियम, सैलरीड को दो बड़े

आगामी वित्त वर्ष 2026 से भारत में इनकम टैक्स प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव लागू होंगे। सरकार ने इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगा। यह नया कानून इनकम-टैक्स रूल्स, 1962 की जगह लेगा और इसमें टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अनुपालन और रिपोर्टिंग के नियमों को कड़ा किया गया है।

सैलरीड कर्मचारियों के लिए दो प्रमुख बदलाव

एकेएम ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर अमित माहेश्वरी के अनुसार, नए नियमों में दो ऐसे बदलाव हैं जो सीधे सैलरीड कर्मचारियों को प्रभावित करेंगे:

1. इलेक्ट्रिक वाहनों पर परक्विजिट टैक्स में राहत

सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को कंसेशनल परक्विजिट वैल्यूएशन नियमों में शामिल किया है। यदि कंपनी इलेक्ट्रिक वाहन का खर्च वहन करती है, तो कर्मचारी को प्रति माह ₹5,000 का लाभ मिलेगा, साथ ही ड्राइवर के लिए ₹3,000 अतिरिक्त मिलेगा। वहीं, यदि कर्मचारी स्वयं वाहन का खर्च उठाता है, तो उसे ₹2,000 प्रति माह और ड्राइवर के लिए ₹3,000 का लाभ मिलेगा। इससे पहले परक्विजिट वैल्यूएशन इंजन की क्षमता पर आधारित था, जो इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उपयुक्त नहीं था। यह बदलाव इलेक्ट्रिक वाहनों को टैक्स के लिहाज से अधिक लाभकारी बनाता है।

2. एचआरए छूट में विस्तार और सीमाएं

नए नियमों के तहत 50% हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) छूट वाले शहरों की सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को शामिल किया गया है। मुंबई, दिल्ली, चेन्नई और कोलकाता पहले से इस श्रेणी में हैं। हालांकि, नोएडा, गुरुग्राम और नवी मुंबई अभी भी 40% एचआरए छूट वाले शहरों में हैं। इसका मतलब है कि एनसीआर क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को टैक्स लाभ कम मिलेगा, जबकि रहने का खर्च मेट्रो शहरों के समान ही है।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

नए टैक्स कानून में अनुपालन को मजबूत करने के लिए डिजिटल रिपोर्टिंग और डेटा-आधारित टैक्स जांच पर जोर दिया गया है। व्यवसायों और उच्च आय वर्ग के टैक्सपेयर्स को अपने अनुपालन तंत्र को अपडेट करना होगा और अधिक दस्तावेजीकरण सुनिश्चित करना होगा।

इसके अलावा, OECD के वैश्विक मानकों के अनुरूप, भारत में डिजिटल संपत्तियों जैसे क्रिप्टो-एसेट्स, सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) और ई-मनी उत्पादों को रिपोर्टेबल खातों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इससे डिजिटल लेन-देन पर निगरानी बढ़ेगी और वित्तीय संस्थानों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।

कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए भी कई बदलाव किए गए हैं, जैसे डेटा सेंटर सेवाओं की परिभाषा का विस्तार, आयकर रिटर्न की समय सीमा से पहले सेफ हार्बर आवेदन की आवश्यकता, और ₹2000 करोड़ की सीमा का पहले वर्ष में मूल्यांकन। ये कदम मुकदमेबाजी को कम करने और समयबद्ध अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हैं।

चैरिटेबल ट्रस्ट्स के लिए भी प्रक्रिया सरल बनाने के लिए रजिस्ट्रेशन और अप्रूवल के लिए एकीकृत आवेदन फॉर्म, केंद्रीकृत प्रोसेसिंग, और रिकॉर्ड रखने की अवधि को 10 साल से घटाकर 6 साल किया गया है।

ये बदलाव टैक्स प्रणाली को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और सख्त अनुपालन वाले बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। सैलरीड कर्मचारियों और अन्य टैक्सपेयर्स के लिए इन नियमों को समझना और समय पर अनुपालन करना आवश्यक होगा।

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