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Share Markerts: पूरी बात आसान भाषा में

Share Markerts: पूरी बात आसान भाषा में को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।

अपडेट को आसान भाषा में समझें

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

ध्यान देने वाली बातें

  • Share Markerts: क्रूड ऑयल सहित दूसरी कमोडिटीज की कीमतों में उछाल से इनफ्लेशन बढ़ने का अनुमान है।
  • कई कंपनियों के मार्जिन पर तो अभी से कमोडिटी की कीमतों में उछाल का असर पड़ने लगा…
  • Share Markerts: इनफ्लेशन बढ़ने के आसार हैं।
  • इसका असर न सिर्फ लोगों के बजट पर पड़ेगा बल्कि कंजम्प्शन घटने से कंपनियों के प्रॉफिट में भी कमी आ सकती है।

LAMORC DIGITAL का संदर्भ

नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।

Share Markerts: इनफ्लेशन बढ़ने के आसार हैं। इसका असर न सिर्फ लोगों के बजट पर पड़ेगा बल्कि कंजम्प्शन घटने से कंपनियों के प्रॉफिट में भी कमी आ सकती है। इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो को नुकसान से बचाने के लिए अभी से कुछ उपाय कर सकते हैं। कुछ खास सेक्टर में निवेश पोर्टफोलियो को नुकसान में जाने से बचा सकता है। ब्रोकरेज फर्म इनक्रेड इक्विटीज ने ऐसे कुछ सेक्टर के बारे में बताया है।

इनफ्लेशन बढ़ने पर इन सेक्टर का रिटर्न बेहतर रहता है

InCred Equities ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बायोटेक, फार्मा और ऑटोमोटिव सेक्टर्स इनफ्लेशन के खराब असर से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि इन सेक्टर का रिटर्न औसत से ज्यादा होता है। साथ ही महंगाई बढ़ने का असर इन सेक्टर की कंपनियों पर कम पड़ता है। उधर, फार्मा कंपनियों को रुपये में कमजोरी का फायदा मिलता है। डॉलर के मुकाबले रुपया काफी गिरा है। इसका फायदा फार्मा जैसी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को मिलेगा।

महंगाई पढ़ने पर इन सेक्टर का प्रदर्शन कमजोर रहता है

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि इनफ्लेशन बढ़ने पर एनर्जी, रियल एस्टेट और यूटिलिटीज का प्रदर्शन कमजोर रहता है। एनर्जी सेक्टर खासकर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का खराब असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि क्रूड में उछाल आने पर वे पेट्रोल,डीजल और एलपीजी की कीमतें नहीं बढ़ा पाती हैं। सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पिछले 4 साल से पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं।

महंगाई बढ़ने पर रियल एस्टेट सेक्टर में डिमांड घट जाती है

रियल एस्टेट और यूटिलिटीज कंपनियों पर भी इनफ्लेशन बढ़ने का खराब असर पड़ता है। इसकी वजह यह है कि इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है। इससे होम लोन महंगा हो जाता है। इसका घरों की डिमांड पर खराब असर पड़ता है।

फार्मा सेक्टर की इन कंपनियों में किया जा सकता है निवेश

इनफ्लेशन बढ़ने पर फार्मा सेक्टर का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहता है। इसका सेक्टर का रिटर्न औसत से ज्यादा रहता है। इसकी वजह यह है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद दवाओं की डिमांड कम नहीं होती है। इनवेस्टर्स फार्मा सेक्टर में Sun Pharma और Lupin के शेयरों में निवेश कर सकते हैं।

ऑटो सेक्टर में इन कंपनियों में किया जा सकता है निवेश

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि इनफ्लेशन बढ़ने पर ऑटोमोटिव सेक्टर का प्रदर्शन भी बेहतर रहता है। उसने ऑटो सेक्टर में Motherson International और Eicher Motors के शेयरों में निवेश की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि दोनों ऐसी कंपनियां हैं, जिनके पास प्राइसिंग पावर है। आयशर मोटर्स की रॉयल एनफील्ड का ब्रांड काफी मजबूत है, जिससे कंपनी को दाम बढ़ाने में दिक्कत नहीं आती है।

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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