विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली: भारतीय इक्विटी बाजार पर क्या है असर?
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2026 के पहले चार महीनों में भारत के सेकेंडरी मार्केट से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। यह लगातार बिकवाली के दबाव को दर्शाता है, जो भारतीय इक्विटी बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
- FIIs ने 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है।
- NSE के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि 4 मई तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री हुई है।
- भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जो 15 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली का भारतीय इक्विटी बाजार पर क्या असर हो रहा है। यह जानने से निवेशकों को अपने निवेश के फैसले में मदद मिल सकती है।
FII outflows: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 2026 के पहले चार महीनों में ही भारत के सेकेंडरी मार्केट से 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, जबकि साल के अभी भी आठ महीने बाकी हैं। यह बाजार में बने लगातार बिकवाली के दबाव को दिखाता है। ग्लोबल फंड दूसरे ऐसे एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं जहां वैल्यूएशन ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं।
NSDL के ताजे आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी से 30 अप्रैल के बीच FIIs ने सेकेंडरी मार्केट में लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है। जबकि, NSE के शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि 4 मई तक लगभग 4,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बिक्री हुई है। सेकेंडरी मार्केट से हुई निकासी की यह मात्रा पूरे साल 2025 के 2.4 लाख करोड़ रुपये और 2024 के 1.29 लाख करोड़ रुपये की तुलना में काफी ज्यादा है।
2024 के मध्य से लगातार हो रही इस बिकवाली की मुख्य वजहें हैं, ऊंचे वैल्यूएशन, सुस्त अर्निंग ग्रोथ और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं। IT और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली तेज हो गई है। इसकी वजहें हैं, IT सेक्टर की कमाई पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के असर को लेकर बनीचिंताएं और चीन,ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे बाज़ारों की तुलना में भारत में AI से जुड़े सीमित अवसर।
कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर बनी चिंताओं,ट्रेजरी आय पर असर डालने वाली बढ़ती बॉन्ड यील्ड और हालिया प्रोविजनिंग नियमों में बदलाव के चलते बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला है।
भू-राजनीतिक घटनाओं ने कोढ़ में खाज का काम किया है। अमेरिका,ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। इससे महंगाई,मुद्रा की स्थिरता और आर्थिक विकास से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं। इस स्थिति ने FII की निकासी में भी और अधिक योगदान दिया है।
भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी हिस्सेदारी में गिरावट
FIIs की तरफ से हो रही लगातार बिकवाली के कारण भारतीय इक्विटी बाजार में विदेशी हिस्सेदारी में गिरावट आई है। NSE में लिस्टेड कंपनियों में यह हिस्सेदारी अप्रैल के मध्य तक गिरकर लगभग 15 प्रतिशत रह गई है, जो 15 साल से भी ज्यादा समय का सबसे निचला स्तर है। इसके साथ ही,भारत ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट के पोर्टफ़ोलियो में सबसे कम वेटेज वाले बाजारों में से एक बन गया है।
बाजार जानकारों का कहना है कि ग्लोबल कैपिटल का फ्लो तेजी से दूसरे एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहा। चीन ने विदेशी निवेश का एक बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींचा है। यहां का CSI 300 इंडेक्स अपनी अर्निंग के लगभग 16 गुना पर ट्रेड कर रहा है,वहीं Nifty लगभग 18 गुना पर है। ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी ज्यादा विदेशी निवेश देखने को मिला है। इनको सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर में उनकी मजबूत स्थिति का सपोर्ट मिला है। TSMC,SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां ग्लोबल AI की मांग से फायदा उठा रही हैं।
चीन और कोरिया के बाजार में बढ़ा निवेश
एशियाई बाजारों पर नजर डालें तो ताइवान का स्टॉक एक्सचेंज 2026 में अब तक डॉलर के हिसाब से लगभग 40 प्रतिशत बढ़ा है,जबकि दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 62 प्रतिशत की बढ़त हुई है। जापान का निक्केई 18 प्रतिशत ऊपर है और शंघाई कंपोजिट में 7 प्रतिशत की बढ़त हुई है। इसके विपरीत,भारत के बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट आई है। सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 13 प्रतिशत और 14 प्रतिशत गिरे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्लोबल लेवल पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी ने विदेशी निवेश को और प्रभावित किया है। इसके चलते खासकर तब जब रुपये का मूल्य गिर रहा है, अमेरिकी ट्रेजरी से डॉलर के रूप में मिलने वाला 4 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न भारतीय इक्विटी की तुलना में अधिक आकर्षक हो गया है।
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FIIs ने प्राइमरी मार्केट में किया निवेश
सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली के बावजूद,FIIs ने भारत के प्राइमरी मार्केट में अपनी मजबूत भागीदारी जारी रखी है। उन्होंने 2024 में ₹1.21 लाख करोड़, 2025 में ₹73,910 करोड़ और 2026 में अब तक लगभग ₹12,156 करोड़ का निवेश किया है। IPOs ने एंट्री के लिए तुलनात्मक रूप से बेहतर वैल्यूएशन दिए हैं। इसने सेकेंडरी मार्केट के 7 प्रतिशत से कुछ ज्यादा के औसत रिटर्न की तुलना में लगभग 37.1 प्रतिशत का औसत रिटर्न दिया है।
डिफेंसिव एसेट्स की ओर भी रुझान बढ़ा
इस बीच डिफेंसिव एसेट्स की ओर भी रुझान बढ़ा है। भारत में 2026 में अब तक गोल्ड ETF में 31,561 करोड़ रुपये का निवेश आया है,जबकि सिल्वर ETF में 7,953 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है
बाजार में बिकवाली का दबाव बने रहने की उम्मीद
अमेरिका और ईरान के बीच अनिश्चितकालीन संघर्ष-विराम के बाद वैश्विक माहौल में सुधार आने से,मार्केट यह आकलन कर रहा हैं कि क्या विदेशी निवेश वापस आएगा। एनालिस्ट्स का कहना है कि हालांकि बिकवाली का दबाव बना रहेगा,लेकिन अभी यह पक्के तौर पर कहना जल्दबाजी होगी कि बाजार की दिशा में कोई स्थायी बदलाव आया है। निवेशकों का फोकस अब कंपनियों की अर्निंग,मांग की स्थिति और कंपनियों से जुड़ी खास खबरों की ओर रहने की उम्मीद है।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।