क्रिप्टो एक्सचेंज और बैंक: स्टेबलकॉइन रिवॉर्ड पर समझौता को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।
अपडेट को आसान भाषा में समझें
पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
ध्यान देने वाली बातें
- Crypto Exchanges vs Banks: क्रिप्टो एक्सचेंजों और बैंकों के बीच लड़ाई के चलते इस साल जनवरी में क्लैरिटी एक्ट को वोटिंग के लिए लाने की कोशिश फेल हो गई थी।
- Crypto Exchanges vs Banks: दिग्गज अमेरिकी क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस ग्लोबल इंक (Coinbase Global Inc) का कहना है कि स्टेबलकॉइन यील्ड से जुड़े एक अहम प्रावधान पर समझौता हो गया है।
- इससे अमेरिकी सीनेट में क्रिप्टो कानून को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है।
- क्रिप्टो एक्सचेंजों को स्टेबलकॉइन रखने पर ग्राहकों को रिवॉर्ड देने की मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर विवाद के कारण इस साल की शुरुआत में यह कानून अटक गया था।
LAMORC DIGITAL का संदर्भ
नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।
Crypto Exchanges vs Banks: दिग्गज अमेरिकी क्रिप्टो एक्सचेंज कॉइनबेस ग्लोबल इंक (Coinbase Global Inc) का कहना है कि स्टेबलकॉइन यील्ड से जुड़े एक अहम प्रावधान पर समझौता हो गया है। इससे अमेरिकी सीनेट में क्रिप्टो कानून को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है। क्रिप्टो एक्सचेंजों को स्टेबलकॉइन रखने पर ग्राहकों को रिवॉर्ड देने की मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं, इस मुद्दे पर विवाद के कारण इस साल की शुरुआत में यह कानून अटक गया था। बैंकों ने रिवॉर्ड पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी, उनका कहना था कि इससे बैंकों से ताबड़तोड़ विदड्रॉल हो सकते हैं।
Crypto Exchanges vs Banks: क्या हुआ समझौता?
कॉइनबेस के चीफ पॉलिसी ऑफिसर फरयार शिरजाद (Faryar Shirzad) का कहना है कि आखिरकार बैंक रिवार्ड्स पर और अधिक प्रतिबंध लगाने में सफल रहे लेकिन क्रिप्टो एक्सचेंज ने वह चीज हासिल की, जो मायने रखती है- क्रिप्टो प्लेटफॉर्म और नेटवर्क्स के वास्तविक इस्तेमाल के आधार पर रिवॉर्ड कमाने की अमेरिकियों की क्षमता। शिरजाद ने ये बातें X (पूर्व नाम Twitter) पर कहीं। अब समझौते के बाद क्रिप्टो मार्केट के स्ट्रक्चर से जुड़े कानून को सीनेट बैंकिंग कमेटी में वोटिंग के लिए आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह बिल डिजिटल एसेट इकोसिस्टम के अलग-अलग हिस्सों पर SEC (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन) और कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन की रेगुलेटरी अथॉरिटीज को स्पष्ट करेगा।
जनवरी में अटक गया था बिल
इस साल की शुरुआत में क्लैरिटी एक्ट (Clarity Act) के नाम से क्रिप्टो बिल को वोटिंग के लिए लाने की कोशिश की गई थी। हालांकि कॉइनबेस के ब्रायन आर्मस्ट्रांग ने तब सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी कंपनी इसका समर्थन नहीं करेगी तो इस बिल को लाने की कोशिश फेल हो गई। उसके बाद से व्हाइट हाउस बैंकों और क्रिप्टो फर्म्स के बीच एक समझौता कराने के लिए काम कर रहा है। अभी यह तय नहीं है कि क्या इंडस्ट्री की सभी चिंताओं का समाधान हो गया है या नहीं, लेकिन शिरजाद ने शुक्रवार को कहा कि कई मामलों में बात काफी आगे बढ़ी है और आर्मस्ट्रांग ने इसे और आगे बढ़ाने की अपील की है।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।