पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता: सरकार का एक्साइज ड्यूटी समायोजन
भारतीय ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डीज़ल और घरेलू एलपीजी की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब वित्त मंत्रालय ने 1 मई, 2026 से पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को 23 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 33 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया है। इसके अतिरिक्त, सरकार ने पेट्रोल पर लगने वाले अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को शून्य कर दिया है। ये समायोजन सेंट्रल एक्साइज एक्ट, 1944 और संबंधित फाइनेंस एक्ट के तहत किए गए हैं।
आम उपभोक्ताओं को राहत, औद्योगिक सेगमेंट में बदलाव
IOC के अनुसार, देश में पेट्रोल और डीज़ल की लगभग 90% खपत आम जनता द्वारा की जाती है, और उनकी कीमतों में कोई फेरबदल नहीं होगा। इसी तरह, 33 करोड़ घरों के लिए घरेलू एलपीजी, घरेलू एयरलाइंस के लिए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF), और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत मिलने वाले केरोसिन की कीमतें भी स्थिर रहेंगी। कंपनी ने बताया कि कुल मिलाकर, लगभग 80% पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जिससे अधिकांश उपभोक्ताओं के लिए स्थिरता बनी रहेगी।
कीमतों में बदलाव मुख्य रूप से कुछ विशिष्ट औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित हैं, जिनकी कुल खपत में हिस्सेदारी कम है और जिनकी कीमतें वैश्विक दरों के आधार पर मासिक रूप से समायोजित की जाती हैं। बल्क और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर, जिनकी खपत कुल का 1% से भी कम है, उनकी कीमतों में वृद्धि देखी गई है। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस के लिए बल्क डीज़ल और एटीएफ की कीमतों में भी बढ़ोतरी की गई है। वहीं, लगभग 4% पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कमी आई है, जो वैश्विक बाजार की चाल को दर्शाती है।
सरकार का संतुलित दृष्टिकोण
IOC ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि यह निर्णय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपनाए गए “सोचे-समझे और संतुलित तरीके” को दर्शाता है। इसका उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को वैश्विक कीमतों में हालिया वृद्धि से बचाना और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है, साथ ही वैश्विक रुझानों के साथ तालमेल बिठाना भी है।
वैश्विक अनिश्चितता और मूल्य निर्धारण का तंत्र
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत गुरुवार को 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। भारत में खुदरा ईंधन की कीमतों में आधार मूल्य, केंद्रीय उत्पाद शुल्क, राज्य वैट (VAT) और डीलर कमीशन शामिल होते हैं। इसलिए, उत्पाद शुल्क में बदलाव का मतलब हमेशा पंप पर तुरंत मूल्य परिवर्तन नहीं होता है।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।