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रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 पर आया, निवेशकों को क्या

रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95 पर आया, निवेशकों को क्या को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।

अपडेट को आसान भाषा में समझें

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

ध्यान देने वाली बातें

  • डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 95 के लेवल पर आया है।
  • इस साल यह करीब 6 फीसदी गिर चुका है।
  • इसका असर इकोनॉमी के साथ ही आम आदमी पर पड़ रहा है।
  • विदेशी फंडों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव…

LAMORC DIGITAL का संदर्भ

नीचे दिया गया विस्तृत हिस्सा मूल अपडेट की जानकारी को सुरक्षित रखते हुए रखा गया है, ताकि पाठक पूरी पृष्ठभूमि और जरूरी विवरण एक ही जगह देख सकें।

डॉलर के मुकाबले रुपया 30 अप्रैल को गिरकर 95.35 पर आ गया। यह रुपये का अब तक का सबसे निचला स्तर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये में कमजोरी की कई वजहें हैं। इनमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल, विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली और डॉलर में मजबूत का हाथ है। अमरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद डॉलर में मजबूती दिखी है।

क्रूड में उछाल ने रुपये पर बढ़ाया दबाव

30 अप्रैल को ब्रेंट क्रूड 126 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह 28 फरवरी को मध्यपूर्व में लड़ाई शुरू होने के बाद ब्रेंट का सबसे हाई लेवल है। अमेरिका के फिर से ईरान पर हमले शुरू करने के अनुमान से ब्रेंट में उछाल आया है। ब्रेंट में उछाल इंडिया के लिए खराब खबर है, क्योंकि यह ऑयल की अपनी 90 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है।

इस साल रुपया 6 फीसदी गिर चुका है

इस साल रुपया करीब 6 फीसदी गिर चुका है। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। क्वांटम एएमसी की फंड मैनेजर स्नेहा पांडेय ने कहा, “रुपये में कमजोरी के आयात करना महंगा हो जाता है। इससे फ्यूल, कुकिंग ऑयल और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतें बढ़ जाती हैं। इसका असर हर परिवार पर पड़ता है।”

रुपये में कमजोरी का असर इनवेस्टर्स पर भी पड़ेगा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि रुपये में कमजोरी का असर इनवेस्टर्स पर भी पड़ेगा। आम तौर पर इक्विटी, डेट और गोल्ड की चाल एक जैसी नहीं होती है। खासकर करेंसी में कमजोरी के बीच गोल्ड को हेजिंग का प्रमुख जरिया माना जाता है। पांडेय ने कहा, “इनवेस्टर्स को मल्टी-एसेट ऐलोकेशन फंड्स में निवेश के बारे में सोचना चाहिए।”

इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?

पांडेय ने कहा कि शेयरों में पैसे लगाने वाले निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में उन कंपनियों को शामिल करना चाहिए, जिनके रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की ज्यादा हिस्सेदारी है। डेट में निवेश में निवेशकों को कम ड्यूरेशन वाले या हाई-क्वालिटी फंड्स पर फोकस करना चाहिए। इससे इंटरेस्ट रेट से जुड़े रिस्क को मैनेज करने में मदद मिलेगी।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सबसे जरूरी निवेशकों को निवेश में अनुशासन बनाए रखना है। खासकर सिप से निवेश करने वाले इनवेस्टर्स को सिप को रोकना नहीं चाहिए। स्टॉक मार्केट और करेंसी में उतार-चढ़ाव की साइकिल चलती रहती है। मुश्किल समय में निवेश रोकने वाले इनवेस्टर्स लंबी अवधि में बड़ा वेल्थ क्रिएट करने का मौका चूक जाते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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