सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट: क्या है वजह?
सोमवार, 27 अप्रैल को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में नरमी देखी गई। यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक संकेतों के कमजोर पड़ने और शेयर बाजार में बढ़ती मजबूती के कारण आई। ऐसे में निवेशक अधिक जोखिम उठाने की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे सोना-चांदी जैसे सुरक्षित माने जाने वाले निवेशों की मांग में थोड़ी कमी आई है।
घरेलू बाजार में क्या हुआ?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, जून डिलीवरी वाले सोने के भाव में ₹349 की गिरावट दर्ज की गई, जो 0.23% की कमजोरी दर्शाता है। यह ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इस सौदे में 1,119 लॉट का कारोबार हुआ। इस गिरावट के पीछे स्पॉट मार्केट में मांग का कमजोर होना और अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले नरम संकेत माने जा रहे हैं।
चांदी की कीमतों पर भी दबाव बना रहा। मई फ्यूचर्स में ₹817 की गिरावट आई, जो 0.33% की कमी है। यह ₹2.43 लाख प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहा था। इस अनुबंध में 1,098 लॉट का कारोबार हुआ। बाजार में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया।
वैश्विक बाजार से मिले संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने-चांदी की चाल मिली-जुली रही। न्यूयॉर्क में सोना 0.05% गिरकर $4,711.98 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी में थोड़ी मजबूती देखी गई और यह 0.29% बढ़कर $75.94 प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बुलियन मार्केट फिलहाल कई कारकों से प्रभावित हो रहा है, जिनमें वैश्विक जोखिम लेने की प्रवृत्ति और व्यापक आर्थिक अनिश्चितताएं शामिल हैं।
VT Markets के सीनियर मार्केट एनालिस्ट जस्टिन खू के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि के बावजूद वैश्विक बाजार अभी भी स्थिर बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोना फिलहाल एक सीमित दायरे में चल रहा है, जो दर्शाता है कि एक सुरक्षित निवेश के तौर पर इसकी मांग अभी पूरी तरह से मजबूत नहीं हुई है।
विशेषज्ञों की राय: आगे क्या?
LKP सिक्योरिटीज के वीपी रिसर्च (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के मुताबिक, सोना फिलहाल हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस सप्ताह होने वाली नीतिगत बैठक से पहले बाजार सतर्क हो गया है। भले ही ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीद कम है, लेकिन फेड के बयान भविष्य की ब्याज दरों के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं, जो सोने की कीमतों के लिए अहम होंगे।
त्रिवेदी ने यह भी बताया कि डॉलर इंडेक्स लगभग 98 के स्तर पर मजबूत बना हुआ है, जो सोने की कीमतों में तेजी को रोक रहा है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। जतिन त्रिवेदी का अनुमान है कि अल्पावधि में सोना ₹1,50,000 से ₹1,55,000 के दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ कारोबार कर सकता है।
भविष्य की चाल पर नजर
बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में कीमतों में आई गिरावट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार की कमजोरी और फ्यूचर्स मार्केट में पोजीशन कम करना है। इसके अलावा, शेयर बाजार में मजबूती और निवेशकों की जोखिम उठाने की बढ़ती प्रवृत्ति ने सोना-चांदी की मांग को कम किया है, जिससे कीमतों पर दबाव आया है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल काफी हद तक वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशक विशेष रूप से मुद्रास्फीति के आंकड़ों, ब्याज दरों से जुड़े संकेतों और भू-राजनीतिक स्थिति पर बारीकी से नजर रखेंगे। इन्हीं कारकों के आधार पर यह तय होगा कि कीमतों में आगे तेजी आएगी या दबाव बना रहेगा।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।