वसीयत नहीं होने पर क्या होता है और कैसे बचें विवाद से
भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बंटवारा अपनी इच्छा के अनुसार तय कर सकता है, लेकिन इसके लिए वसीयत बनाना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।
- वसीयत बनाने के लिए आवश्यक है कि टेस्टेटर (व्यक्ति जो वसीयत बना रहा है) के हस्ताक्षर हों और कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर भी हों।
- गवाहों को वसीयत की जानकारी होना जरूरी नहीं है, लेकिन वसीयत को रजिस्टर कराना भविष्य में विवाद की आशंका कम करने में मदद करता है।
- वसीयत स्टांप पेपर पर ही बने, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकिन इसे साधारण कागज पर भी लिखा जा सकता है।
बिना वसीयत के संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार किया जाता है, जिससे परिवार में विवाद भी हो सकता है। इसलिए समय रहते अपनी संपत्ति की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए और वसीयत तैयार करना सबसे बेहतर तरीका है।
कई लोग अपनी जिंदगी में संपत्ति तो बना लेते हैं, लेकिन उसके बंटवारे की साफ योजना नहीं बनाते। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति का निधन बिना वसीयत (Will) के हो जाता है, तो संपत्ति का बंटवारा विवाद की वजह बन जाता है। आइए जानते हैं कि वसीयत न होने पर संपत्ति का बंटवारा कैसे होता है और समय रहते सही प्लानिंग करना क्यों जरूरी है।
मुंबई के CA और CFA बलवंत जैन के मुताबिक, भारतीय कानून के तहत कोई भी व्यक्ति अपनी संपत्ति का बंटवारा अपनी इच्छा के अनुसार तय कर सकता है। इसके लिए वसीयत बनाना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है।
Indian Succession Act, 1925 के अनुसार, व्यक्ति अपनी पूरी या कुछ संपत्ति किसी को भी दे सकता है। इसमें परिवार के सदस्य, रिश्तेदार, यहां तक कि कोई बाहरी व्यक्ति या चैरिटेबल ट्रस्ट भी शामिल हो सकते हैं।
वसीयत को वैध बनाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं:
वसीयत पर उस व्यक्ति (टेस्टेटर) के हस्ताक्षर होना जरूरी है कम से कम दो गवाहों के हस्ताक्षर होने चाहिए गवाहों को वसीयत की जानकारी होना जरूरी नहीं है
ध्यान देने वाली बात यह है कि वसीयत को रजिस्टर कराना जरूरी नहीं है, लेकिन इसे रजिस्टर कराने से भविष्य में विवाद की आशंका कम हो जाती है। इसके अलावा वसीयत स्टांप पेपर पर ही बने, ऐसा जरूरी नहीं है। इसे साधारण कागज पर भी लिखा जा सकता है।
बिना वसीयत के क्या होता है
अगर किसी व्यक्ति का बिना वैध वसीयत के निधन होता है, तो इसे ‘इंटेस्टेट’ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में संपत्ति का बंटवारा कानून के अनुसार किया जाता है।
Hindu Succession Act, 1956 की धारा 8 के मुताबिक, संपत्ति सबसे पहले कानूनी वारिसों (Legal Heirs) को मिलती है।
किसे कितना हिस्सा मिलता है
अगर किसी व्यक्ति के परिवार में पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं, तो बिना वसीयत के उनकी संपत्ति तीनों में बराबर बांटी जाती है। इसका मतलब है…
पत्नी को 1/3 हिस्सा बेटे को 1/3 हिस्सा बेटी को 1/3 हिस्सा
इस स्थिति में व्यक्ति की अपनी इच्छा लागू नहीं होती, बल्कि कानून के नियम लागू होते हैं।
सही प्लानिंग क्यों जरूरी है
बिना वसीयत के संपत्ति का बंटवारा तय तो हो जाता है, लेकिन कई बार इससे परिवार में विवाद भी हो सकता है। इसलिए समय रहते अपनी संपत्ति की स्पष्ट योजना बनानी चाहिए। इसका सबसे बेहतर तरीका वसीयत तैयार करना है, ताकि आगे चलकर किसी तरह की कानूनी परेशानी या पारिवारिक तनाव से बचा जा सके।
वसीयत बनाना सिर्फ अमीर लोगों के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जिसके पास कोई भी संपत्ति है। यह कदम आपके परिवार को भविष्य में सुरक्षा और स्पष्टता दोनों देता है।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।