LAMORC DIGITAL

प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी बिलिंग पर लगेगी लगाम

प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी बिलिंग पर सरकार का बड़ा कदम

सरकार प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी बिलिंग के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक सरकार सीरिंज, ग्लव्स, केन्यूला जैसे बेसिक आइटम्स से लेकर पेसमेकर, हार्ट वॉल्व जैसे मेडिकल डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन पर कैप लगाने पर विचार कर रही है।

  • सरकार बिल में क्रिटिकल मेडिकल डिवाइसेज की ओवरचार्जिंग को रोकने के लिए कदम उठाने जा रही है।
  • सीरिंज और केन्यूला जैसे आइटम्स पर मनमानी कीमत वसूली जा रही है, जो कि 10 से 30 गुना ज्यादा है।
  • इस पर कैप लगाने से जरूरी मेडिकल डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन पर नियंत्रण मिलेगा। इसमें पेसमेकर्स और हार्ट वॉल्व समेत एक दर्जन आइटम्स शामिल हो सकते हैं।

इस कदम से इलाज सस्ता हो सकता है और स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भी कम होने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम आम लोगों को राहत देने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

प्राइवेट हॉस्पिटल्स की अंधाधुंध बिलिंग के खिलाफ सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। सूत्रों के मुताबिक सरकार सीरिंज,ग्लव्स,केन्यूला जैसे बेसिक आइटम्स से लेकर पेसमेकर,हार्ट वॉल्व जैसे मेडिकल डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन पर कैप लगाने पर विचार कर रही है ताकि मेडिकल बिल में हॉस्पिटल्स एक तय मार्जिन से ज्यादा किसी भी मरीज से कीमत न वसूल सकें। सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता आलोक प्रियदर्शी ने सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर बताया कि सरकार प्राइवेट हॉस्पिटल्स की ओवरचार्जिंग से नाराज है।

सूत्रों के मुताबिक बिल में क्रिटिकल मेडिकल डिवाइसेज की ओवरचार्जिंग हो रही है। सीरिंज और केन्यूला जैसे आइटम्स पर मनमानी कीमत वसूली जा रही है। प्राइवेट हॉस्पिटल इनकी 10 से 30 गुना ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। ऐसे में जरूरी मेडिकल डिवाइसेज के ट्रेड मार्जिन पर कैप लग सकता है। इसमें पेसमेकर्स और हार्ट वॉल्व समेत एक दर्जन आइटम्स शामिल हो सकते हैं।

आमतौर एक सीरिंज की कास्टिंग 3 रुपए होती है। उसकी हॉस्पिटल्स में करीब 30 रुपए तक बिलिंग की जाती है। इसी तरह आईवी कैनुलर्स महज 6 रुपए के होते हैं लेकिन इसकी बिलिंग 120 रुपए तक की जाती है। पेसमेकर जो 25,000 रुपए का आता है उसकी बिलिंग 2 लाख रुपए तक की जाती है। हार्ट वॉल्व जो इंपोर्ट किया जाता ओर आमतौर पर 4 लाख रुपए का आता है उसकी बिलिंग 26 लाख रुपए तक की जाती है

सूत्रों के मुताबिक इस पर मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री और बीमा कंपनियों के सुझाव पर विचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय इस पर विचार कर रहा है। लागत का निश्चित ट्रेड मार्जिन फिक्स करने पर चर्चा हो रही है। इसके जरिए ट्रेड मार्जिन कैप करके हॉस्पिटल्स के बिल में पारदर्शिता लाने की कोशिश की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले भी सरकार ने स्टेंट और घुटने के इम्प्लांट की कीमतों पर नियंत्रण लगाया था,जिसका सीधा फायदा मरीजों को मिला था। उसी तरह अब अन्य जरूरी मेडिकल उपकरणों पर भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की योजना है। अगर यह फैसला लागू होता है तो इससे न सिर्फ इलाज सस्ता हो सकता है, बल्कि स्वास्थ्य बीमा का प्रीमियम भी कम होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर,सरकार का यह कदम आम लोगों को राहत देने और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

नींद के डॉक्टर ने बता दिया दिनभर थकान फील करने का राज, क्या आपके साथ भी होता है ऐसा?

Build a better, regular income stream with LAMORC DIGITAL. Join as our partner today.

Become Our Partner Now

पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top