अमेरिकी डॉलर की मजबूती से सोने की कीमतों में गिरावट
मंगलवार को अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती के कारण सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। निवेशकों की निगाहें फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता पर टिकी हैं। स्पॉट गोल्ड की कीमतों में 0.2% की गिरावट आई और यह $4,807.91 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले सोमवार को भी सोने की कीमतों में नरमी देखी गई थी, जो 13 अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई थीं। हालांकि, जून डिलीवरी के लिए यूएस गोल्ड फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और यह $4,827.30 पर स्थिर रहा।
अन्य कीमती धातुओं की बात करें तो स्पॉट सिल्वर 0.6% गिरकर $79.40 प्रति औंस पर आ गया, जबकि प्लैटिनम 0.7% की गिरावट के साथ $2,074 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, पैलेडियम में 0.3% की बढ़त देखी गई और यह $1,556.16 पर पहुंच गया।
ईरान-अमेरिका वार्ता का सोने की चाल पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत सोने की कीमतों की दिशा तय करेगी। कैपिटलडॉटकॉम के सीनियर फाइनेंशियल मार्केट एनालिस्ट कायली रोड्डा के अनुसार, निवेशक इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस्लामाबाद में वार्ता आगे बढ़ेगी और क्या इससे युद्धविराम का विस्तार होगा या कोई शांति समझौता होगा। रोड्डा बताते हैं कि यदि शांति वार्ता सफल होती है, तो सोने की कीमतों को अच्छा समर्थन मिल सकता है, क्योंकि इससे तेल की कीमतों में गिरावट आने की संभावना है। इसके विपरीत, यदि वार्ता विफल रहती है, तो बाजार में फिर से अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत की संभावनाओं ने तेल की कीमतों पर भी दबाव डाला है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों के चलते तेल की कीमतों में गिरावट आई। कच्चे तेल के महंगे होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जिससे महंगाई बढ़ती है। सोना पारंपरिक रूप से महंगाई के खिलाफ एक बचाव का साधन माना जाता है, इसलिए महंगाई बढ़ने पर इसकी मांग बढ़ती है। हालांकि, बढ़ती ब्याज दरें अन्य आय-उत्पादक संपत्तियों को अधिक आकर्षक बना सकती हैं, जिससे सोने की मांग पर दबाव पड़ सकता है।
शांति वार्ता की उम्मीदें और संभावित परिणाम
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने सोमवार को रॉयटर्स को बताया कि ईरान पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में भाग लेने पर विचार कर रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी प्रतिबंधों को समाप्त करने के प्रयास शुरू किए हैं। इन प्रयासों को ईरान और अमेरिका के बीच शांति की कोशिशों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था, खासकर तब जब दो सप्ताह का युद्धविराम समाप्त होने वाला है।
ईरान के इस कदम को कुछ विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरानी नेतृत्व की एक चाल के रूप में भी देख रहे हैं।
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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।