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सोना खरीदने के लिए ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF: कौन सा

सोना खरीदने के लिए सही विकल्प की तलाश

सोना खरीदने के लिए कई विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से कौन सा सबसे अच्छा है? यह जानने के लिए आइए हम फिजिकल ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF के फायदे और नुकसान को समझें.

  • फिजिकल ज्वेलरी: निवेश के लिए कम फायदेमंद, 3% GST और 8-25% मेकिंग चार्जेस के साथ
  • डिजिटल गोल्ड: छोटी शुरुआत के लिए आसान, लेकिन सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर जोखिम बना रहता है
  • गोल्ड ETF: सबसे स्मार्ट विकल्प, SEBI द्वारा रेगुलेटेड, शुद्धता और चोरी का कोई डर नहीं

आपको यह जानने के लिए कि कौन सा विकल्प सबसे अच्छा है, यह जानना महत्वपूर्ण है कि आप अपने निवेश की मानसिकता और कंपाउंडिंग को कैसे बनाए रख सकते हैं। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने निवेश के फैसले को सोच-समझकर लें और अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सही विकल्प चुनें।

Gold Investment Guide: सोना हमेशा से भारतीयों के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद ऑप्शन रहा है। लेकिन आज सवाल यह नहीं है कि सोना खरीदें या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि कैसे खरीदें? आज मार्केट में सोना खरीदने के कई ऑप्शन मौजूद है। इनमें प्रमुख रूप से फिजिकल ज्वेलरी, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF है। इन तीनों के अपने फायदे और नुकसान हैं। निवेश के नजरिए से आपके लिए क्या सही है? एक्सपर्ट्स की राय के साथ आइए आपको समझाते हैं पूरा गणित।

फिजिकल गोल्ड ज्वेलरी: निवेश कम, भावनाएं ज्यादा

भारत में शादियों और त्योहारों पर गहने खरीदना एक परंपरा है, लेकिन निवेश के लिहाज से यह सबसे कम फायदेमंद है। ‘मीरा मनी’ के इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट रोहन गोयल बताते हैं कि गहनों पर 3% GST के साथ 8% से 25% तक ‘मेकिंग चार्जेस’ देने होते हैं। जब आप गहने बेचते हैं, तो मेकिंग चार्जेस और टैक्स का पैसा वापस नहीं मिलता। साथ ही शुद्धता को लेकर भी हमेशा संदेह बना रहता है। उनके अनुसार ज्वेलरी खरीदना ‘यूज’ के लिए अच्छा ऑप्शन है, लेकिन शुद्ध निवेश के लिए नहीं।

डिजिटल गोल्ड: छोटी शुरुआत के लिए आसान

अगर आप बहुत कम पैसे जैसे- ₹100 या ₹500 से अपने निवेश जर्नी की शुरुआत करना चाहते हैं, तो पेटीएम, अमेजन और इंस्टामार्ट जैसे प्लेटफॉर्म डिजिटल गोल्ड का विकल्प देते हैं। इसे खरीदना और बेचना बेहद आसान है। आपको सोने को संभालकर रखने या चोरी होने की चिंता नहीं करनी पड़ती। हालांकि, इसमें सबसे बड़ी समस्या यह है कि डिजिटल गोल्ड भारत में किसी केंद्रीय अथॉरिटी जैसे- RBI या SEBI द्वारा रेगुलेटेड नहीं है। इसमें सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर हमेशा एक जोखिम बना रहता है।

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गोल्ड ETF: सबसे स्मार्ट विकल्प

अगर आप निवेश की एफिशिएंसी और पारदर्शिता चाहते हैं, तो गोल्ड ETF सबसे बेहतर विकल्प के रूप में उभरता है। यह SEBI द्वारा रेगुलेटेड होता है और शेयर बाजार में स्टॉक की तरह ट्रेड किया जाता है। इसमें शुद्धता या चोरी का कोई डर नहीं है। रोहन गोयल के अनुसार, बजट 2024 के बाद गोल्ड ETF को 12 महीने बाद बेचने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के तहत 12.5% टैक्स लगता है। वहीं फिजिकल और डिजिटल गोल्ड के लिए यह समय सीमा 24 महीने है। इसके लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना जरूरी है।

निवेश की मानसिकता और कंपाउंडिंग

‘PNGS’ के COO आदित्य मोदक गोल्ड में निवेश को लेकर एक दिलचस्प बात बताते हैं। डिजिटल गोल्ड इतना आसान है कि लोग अक्सर 10-15% मुनाफा मिलते ही उसे बेच देते हैं। इससे लंबे समय में मिलने वाले ‘कंपाउंडिंग’ यानी ब्याज पर ब्याज का फायदा नहीं मिल पाता। इसके विपरीत, फिजिकल गोल्ड को लोग तभी बेचते हैं जब बहुत ज्यादा जरूरत हो, इसलिए वह लंबे समय तक बना रहता है।

अधिल शेट्टी (CEO, BankBazaar): ‘मार्केट से जुड़े मुनाफे के लिए गोल्ड ETF सबसे पारदर्शी है। ज्वेलरी को सिर्फ इस्तेमाल के लिए ही खरीदें क्योंकि इसकी रीसेल वैल्यू कम होती है।’

डॉ. रेनिशा चैनानी (Augmont): ‘छोटे और नियमित निवेश के लिए डिजिटल गोल्ड ठीक है, लेकिन लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए ETF जैसे फाइनेंशियल गोल्ड ज्यादा असरदार हैं।’

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पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।

यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।

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