West Asia Crisis: पूरी बात आसान भाषा में को पढ़ते समय सबसे जरूरी बात यह है कि खबर के मुख्य तथ्य वही रहें, लेकिन पाठक को संदर्भ साफ और सरल भाषा में मिले।
अपडेट को आसान भाषा में समझें
पाठकों को इसे टैक्स और अनुपालन से जुड़े अपडेट के रूप में देखना चाहिए, न कि व्यक्तिगत सलाह के रूप में।
ध्यान देने वाली बातें
- West Asia Crisis: मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव के कारण प्लास्टिक की कीमतों में 70% की वृद्धि हो चुकी है।
- 100 रुपये प्रति किलो के भाव से मिलने वाली प्लास्टिक की कीमत 170 रुपये…
- West Asia Crisis: वेस्ट एशिया में युद्ध के चलते खिलौने महंगे हो गए हैं।
- टॉय मैन्युफैक्चरिंग में अहम रॉ-मटेरियल ABS प्लास्टिक और ग्रेन्यूल्स के दामों में पिछले 2 महीनों में करीब 70-80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
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West Asia Crisis: वेस्ट एशिया में युद्ध के चलते खिलौने महंगे हो गए हैं। टॉय मैन्युफैक्चरिंग में अहम रॉ-मटेरियल ABS प्लास्टिक और ग्रेन्यूल्स के दामों में पिछले 2 महीनों में करीब 70-80 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। साथ ही इंपोर्टेड कंपोनेंट की उपलब्धता भी प्रभावित हुई है,जिससे घरेलू बाजार में खिलौनों की कीमत 20 फीसदी तक बढ़ गई है। सीएनबीसी-आवाज़ संवाददाता आलोक प्रियदर्शी ने दिल्ली के झंडेवालान टॉय मार्केट का जायजा लिया। इससे पता चलता है कि युद्ध के चलते खिलौने महंगे हो गए हैं। इससे भारतीय खिलौनों का बाजार प्रभावित हुआ है।
प्लास्टिक की लागत बढ़ने से खिलौने भी हुए महंगे
जब से अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव की शुरुआत हुई है तब से कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी देखने को मिली है। इसके कारण कच्चे तेल से जुड़े कच्चे माल की लागत बढ़ती जा रही है। जिसका असर अब प्लास्टिक की लागत में तेजी के तौर पर भी देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक की लागत बढ़ने से खिलौने भी महंगे हो रहे हैं।
ग्लोबल टेंशन से घरेलू बाजार में महंगे हुए खिलौने
ग्लोबल टेंशन से रॉ मटेरियल के दामों में 70 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। ABS,PP,PVC और रेजिंस की कीमतें बढ़ीं हैं। चीन और ताइवान से आने वाले इंपोर्टेड कंपोनेंट की सप्लाई में भी दिक्कत आ रही है। घरेलू टॉय मैन्युफैक्चरिंग का सालाना टर्नओवर करीब 2-3 अरब डॉलर है। खिलौनों का सालाना एक्सपोर्ट करीब 15 करोड़ डॉलर का है। खिलौनों की मैन्युफैक्चरिंग में 4000 से ज्यादा MSMEs यूनिटें शामिल हैं।
प्लास्टिक की कीमतों में 70% की बढ़त
ऑल इंडिया टॉय मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शब्बीर गबाजीवाला ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव के कारण प्लास्टिक की कीमतों में 70% की वृद्धि हो चुकी है। 100 रुपये प्रति किलो के भाव से मिलने वाली प्लास्टिक की कीमत 170 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। हालांकि युद्ध विराम की खबरों ने थोड़ी राहत दी जिसके बाद प्लास्टिक की कीमत 150 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।
कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता फेल होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में फिर आग लग गई है। अमेरिका की होर्मुज की नाकेबंदी की धमकी के बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार निकल गई हैं। पिछले एक महीने में ही क्रूड की कीमतों में करीब 12% का उछाल आ चुका है।
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यह लेख उपलब्ध स्रोत-सूचना के आधार पर सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी, टैक्स, निवेश या वित्तीय सलाह न माना जाए।